रोटोग्रेव्योर प्रिंटिंग (Rotogravure Printing) अपनी हाई-डेफिनिशन क्वालिटी, टिकाऊपन और लाखों बैग्स की लगातार प्रिंटिंग के लिए जानी जाती है। लेकिन इस पूरी प्रिंटिंग प्रोसेस की सफलता मुख्य रूप से दो तकनीकी चरणों पर निर्भर करती है:
- Cylinder Engraving (सिलेंडर पर डिज़ाइन की उकेराई)
- Doctor Blade Wiping (डॉक्टर ब्लेड द्वारा इंक की सफाई)
यदि इन दोनों में से एक भी प्रक्रिया सही तरीके से न हो, तो प्रिंट में कलर वेरिएशन, धुंधलापन या इंक का फैलाव (Ink Smudging) हो सकता है। आइए दोनों को गहराई से समझते हैं।
रोटोग्रेव्योर प्रिंटिंग में रबर या प्लास्टिक की प्लेट के बजाय भारी कॉपर-प्लेटेड स्टील सिलेंडर्स (Copper Engraved Cylinders) का इस्तेमाल होता है। डिज़ाइन को सीधे इस कॉपर की सतह पर छोटे-छोटे सूक्ष्म गड्ढों (Microscopic Cells) के रूप में उकेरा (Engrave) जाता है।
सिलेंडर बनाने का प्रोसेस (Step-by-Step):
- Base Steel Pipe: सबसे पहले एक मजबूत स्टील पाइप को बेस के रूप में लिया जाता है और उसे बेलनाकार आकार में फिनिश किया जाता है।
- Copper Plating: इस स्टील रोलर पर इलेक्ट्रोप्लेटिंग प्रक्रिया द्वारा कॉपर (तांबे) की एक परत चढ़ाई जाती है, क्योंकि कॉपर पर नक्काशी (Engraving) करना आसान होता है।
- Engraving (डिजाइन उकेरना):
- Electromechanical Engraving: डायमंड स्टाइलस (Diamond Stylus) लेजर की तरह प्रति सेकंड 4,000 से 8,000 गड्ढे (Cells) बनाता है।
- Laser Engraving (Direct Laser): आधुनिक सीटीपी (Direct-to-Cylinder) मशीनों में लेजर बीम का उपयोग किया जाता है, जो अत्यधिक सटीक HD प्रिंटिंग देता है।
- Chrome Plating (हार्डनिंग): एनग्रेविंग पूरी होने के बाद कॉपर के ऊपर **क्रोमियम (Chrome) की पतली और कठोर परत** चढ़ाई जाती है ताकि डॉक्टर ब्लेड के घर्षण से सिलेंडर घिसे नहीं और लाखों प्रिंट निकाल सके।
जब कॉपर सिलेंडर घूमते हुए नीचे बने इंक पैन (Ink Tray) में डूबता है, तो पूरे सिलेंडर पर (गड्ढों के अंदर भी और सिलेंडर की चिकनी ऊपरी सतह पर भी) इंक लग जाती है।
Doctor Blade एक बहुत ही पतली और सटीक स्टील की ब्लेड होती है। इसका काम सिलेंडर की ऊपरी चिकनी सतह से फालतू इंक को खुरचकर (Wipe करके) हटाना है, ताकि इंक केवल एनग्रेव किए गए गड्ढों (Cells) के अंदर ही बचे।
Doctor Blade वाइपिंग कैसे काम करता है?
- Blade Material: यह उच्च गुणवत्ता वाले स्वीडिश कार्बन स्टील या सेरामिक-कोटेड स्टील से बनी होती है।
- Wiping Action: ब्लेड सिलेंडर के घूमने की विपरीत दिशा में एक निश्चित एंगल (आमतौर पर 55° से 65°) पर सेट होती है।
- Oscillation Move: वाइपिंग के दौरान ब्लेड केवल एक जगह रुकी नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे दाएं-बाएं (Left-Right Oscillation) सरकती रहती है। इससे सिलेंडर और ब्लेड दोनों एक जगह से नहीं घिसते।
- Impression Transfer: फालतू इंक साफ होने के बाद, जब BOPP फिल्म या पेपर रोल सिलेंडर से दबकर गुजरता है, तो गड्ढों में भरी इंक ट्रांसफर होकर फिल्म पर एकदम साफ़ प्रिंट दे देती है।
Cylinder Engraving और Doctor Blade में अंतर
| पैरामीटर (Parameter) | Cylinder Engraving | Doctor Blade Wiping |
|---|---|---|
| मुख्य भूमिका | डिजाइन को इंक होल्डिंग सेल्स में बदलना | गैर-प्रिंटिंग एरिया से फालतू इंक को हटाना |
| इस्तेमाल होने वाला मटेरियल | कॉपर और क्रोम प्लेटेड स्टील रोलर | कार्बन/सिरेमिक फ्लेक्सिबल स्टील ब्लेड |
| मेंटेनेंस/बदलाव | डिजाइन बदलने पर ही नया बनता है | घिसने पर नियमित अंतराल पर बदली जाती है |
| प्रिंट क्वालिटी पर प्रभाव | डिजाइन की शार्पनेस और डॉट्स तय करता है | बैकग्राउंड की सफाई और कलर स्मजिंग रोकता है |
डॉक्टर ब्लेड और सिलेंडर से जुड़ी आम समस्याएं और समाधान
- Doctor Blade Streaks (लाइन्स आना): यदि ब्लेड में कोई डैमेज या धूल का कण फंस जाए, तो प्रिंट में लंबी लाइनें दिखने लगती हैं। इसके लिए ब्लेड को साफ़ या चेंज करना पड़ता है।
- Hazing / Fogging: यदि डॉक्टर ब्लेड का प्रेशर या एंगल सही न हो, तो पूरे बैग पर हल्का धुंधलापन (Color Tint) आ जाता है।
- Cylinder Chrome Wear: यदि क्रोम की परत घिस जाए, तो कॉपर दिखने लगता है और प्रिंटिंग क्वालिटी खराब हो जाती है। इसके लिए सिलेंडर की री-क्रोमिंग (Re-chroming) करानी पड़ती है।
